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बहुचर्चित पुलिस इंस्पेक्टर पर लटकी तलवार, कार्रवाई के लिए डीजीपी ऑफिस ने शासन से मांगी इजाजत

गाजीपुर। बहुचर्चित पुलिस इंस्पेक्टर प्रवीण यादव के लिए आगे आने वाले दिन सहज नहीं रहेंगे। उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के लिए डीजीपी ऑफिस ने शासन से इजाजत मांगी है। प्रवीण यादव वही हैं जो समाजवादी पार्टी के राज में गाजीपुर में तैनात थे और यहां उनकी तूती बोलती थी। उस वक्त महज सब इंस्पेक्टर थे। बावजूद पुलिस महकमे के तब के आला अफसर तक उनकी खुशी-नाखुशी का पूरा ख्याल रखते थे। अपने समकक्षों को थाने का प्रभार दिलवाते थे या प्रभार छिनवाते थे। भाजपाई उन्हें जैसे फूटी आंख नहीं सुहाते थे। जब तब वह इन्हें लठियाते-गरियाते थे। गाजीपुर से तबादले के बाद पदोन्नति पाकर वह इंस्पेक्टर बन गए और इन दिनों सुल्तानपुर जिले में तैनात हैं।

अब जबकि उनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज होने की प्रक्रिया शुरू हुई है तो सबसे ज्यादा खुशी भी भाजपाइयों में ही है। मामला 2016 का है। तब प्रवीण यादव सुहवल थाने के इंचार्ज थे। आरोप है कि प्रवीण यादव 21 सितंबर 2016 को सदलबल जमानियां कोतवाली के किशुनपुर स्थित महिला शिक्षक सपना पांडेय के घर में घुसे और उन्हें जबरिया हिरासत में लेकर यूबीआई ब्रांच में ले गए। जहां उनके खाते से रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर करवाए। हालांकि सपना पांडेय वैसा करने से मना कर दी तो वह उनको अपने अंदाज में समझा दिए।

अपने साथ हुए उस वाकये में सपना पांडेय आईजी वाराणसी के यहां 28 सितंबर 2016 को पहुंचकर तहरीर दी। आईजी वाराणसी ने उसकी जांच कराई। उसमें प्रवीण यादव के अलावा तत्कालीन महिला थाना इंचार्ज सीमा सरोज सहित कुल छह पुलिस कर्मी और तत्कालीन यूबीआई ब्रांच मैनेजर वगैरह प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए। लिहाजा उनके विरुद्ध 2017 में आईपीसी की धारा जमानियां कोतवाली में 384, 342, 120बी व 506 के तहत अभियोग दर्ज हुआ। आईजी ने मामले की विवेचना की जिम्मेदारी सीओ जमानियां को देने और उसका पर्यवेक्षण करने के लिए तत्कालीन पुलिस कप्तान अरविंद सेन को आदेशित किया। बावजूद श्री सेन ने निष्पक्षता के नाम पर अपने वाचक को विवेचना सौंप दी।

पीड़ित सपना पांडेय डीआईजी वाराणसी के यहां पहुंच कर विवेचना की निष्पक्षता पर संदेह जताईं। डीआईजी ने 29 मई 2017 को केस को विवेचना के लिए जौनपुर स्थानांतरित कर दिया। जौनपुर में केराकत थाना इंचार्ज को विवेचना दी गई लेकिन पीड़ित सपना पांडेय उससे संतुष्ट नहीं हुईं। तब विवेचना जौनपुर सीओ सीटी को दी गई। उन्होंने विवेचना कर अंतिम रिपोर्ट प्रेषित कर दी। उस अंतिम रिपोर्ट पर भी पीड़ित सपना पांडेय ने असंतोष जाहिर किया। उसके बाद छह जून 2018 को इसकी विवेचना एसपी ग्रामीण वाराणसी को दी गई। उन्होंने सीओ सीटी जौनपुर की अंतिम रिपोर्ट निरस्त करते हुए जमानियां कोतवाली में दर्ज एफआईआर में अंकित धाराओं को यथोचित बताया।

अब इसी मामले में मुख्यालय पुलिस महानिदेशक के अपर पुलिस महानिदेशक (कार्मिक) राजकुमार ने मुख्यमंत्री के विशेष सचिव को चिट्ठी भेजकर प्रवीण यादव सहित अन्य पुलिस के विरुद्ध आगे की कार्रवाई के लिए अनुमति मांगी है।

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