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पूर्व विधायक कालीचरण की बसपा से मोह भंग की यह वजह तो नहीं!

गाजीपुर। एक ओर राजनीतिक दलों के जातीय समीकरण में राजभर समाज केंद्र में है वहीं इस समाज के प्रमुख राजनीतिक चेहरे कालीचरण राजभर का बसपा को अलविदा कहना राजनीतिक हलके में चर्चा का विषय बन गया है।

बसपा कालीचरण को भरपूर मौका दी। विधानसभा के पिछले चार चुनावों में उन्हें गाजीपुर की जहूराबाद सीट से चुनाव लड़ाई। शुरू के दो चुनावों में 2002 तथा 2007 में उन्होंने अपनी जीत दर्ज कराई मगर 2012 में वह हैट्रिक लगाने से चूक गए थे। बावजूद 2017 में बसपा फिर से उन पर दाव लगाई लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। फिर भी बसपा में उनका मान-सम्मान बना रहा। संगठन में उनको कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस साल भी 15 जनवरी को बसपा सुप्रिमो मायावती के जन्मदिन पर लंका मैदान में आयोजित कार्यक्रम में भी उनको ससम्मान मंच पर जगह दी गई।

इतना सब कुछ मिलने के बाद भी कालीचरण का बसपा से मोह भंग क्यों हुआ। इसका जवाब लोग अपने स्तर से तलाश रहे हैं। इस क्रम में यह भी नैरेटिव चल पड़ा है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में सियासी समीकरण के मद्देनजर अपना टिकट कटने की भनक उन्हें लग गई थी। ऐसे में समय रहते ही सियासी पाला बदलना उन्होंने मुफिद माना।

कालीचरण की इस सियासी गुगली के लिए पिचिंग पूर्व एमएलसी काशीनाथ यादव ने सेट की। इन दोनों के बीच के रिश्ते काफी पुराने हैं। दोनों का शुमार आला दर्जे के लोक गायक के रूप में शुरू से रही है। काशीनाथ यादव भी कभी बसपा में हुआ करते थे। उन्हें भी बसपा विधान परिषद में दो बार भेजी थी।

हालांकि सपा कालीचरण को किन शर्तों पर अपने साथ लाई है यह तो नहीं मालूम लेकिन राजभर वोट बैंक को साधने की राजनीतिक दलों में जिस हद तक जोर आजमाइश चल रही है ऐसे में कालीचरण राजभर सरीखे नेता को अपने पाले में लाकर सपाई जरूर अपर हैंड पर होने का एहसास कर रहे हैं।

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