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शम्मी ने उठाई फुल्लनपुर रेलवे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज की मांग, निर्णायक संघर्ष का एलान

गाजीपुर। सिटी रेलवे स्टेशन से लगभग सटी फुल्लनपुर रेलवे क्रासिंग पर प्रायः लंबे ट्रैफिक जाम की समस्या का एहसास प्रमुख समाजसेवी विवेक सिंह शम्मी को भी है। इस समस्या को वह रेलवे के अधिकारियों के संज्ञान में भी लाए मगर कुछ नहीं हुआ। अब उन्होंने इसके लिए लंबी और निर्णायक लड़ाई का एलान किया है।

शायद शम्मी को अंदाजा है कि बगैर लंबी लड़ाई रेलवे अधिकारियों के कानों पर जूं नहीं रेंगती। गाजीपुर-दिल्ली के बीच चलने वाली सुपर फास्ट ट्रेन सुहेलदेव एक्सप्रेस के बलिया तक विस्तार को लेकर आए प्रस्ताव को वापस कराने के लिए भी उनको लंबा संघर्ष करना पड़ा था और आखिर में प्रस्ताव निरस्त करा कर ही दम लिए थे।

शायद यही वजह है कि अब उन्होंने फुल्लनपुर रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज के निर्माण के लिए लंबी लड़ाई की रूपरेखा तैयार कर ली है। बकौल शम्मी, शुरुआत पहली मार्च से रेलवे अधिकारियों को ज्ञापन देने के साथ होगी। फिर हस्ताक्षर अभियान चलेगा। उसके बाद धरना-प्रदर्शन होगा। तब भी बात नहीं बनी तो बेमियादी अनशन शुरू होगा और वह तब तक चलेगा जब तक नतीजा नहीं निकलेगा।

फुल्लनपुर रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज के अभाव में विकट होती जा रही ट्रैफिक समस्या का जिक्र करते हुए शम्मी ने कहा कि गाजीपुर के लोगों की खुशकिस्मती कि रेलवे के विकास कार्य चल रहे हैं और बदकिस्मती यह कि इन विकास कार्यों में दूरदर्शिता नहीं अपनाई जा रही है और फुल्लनपुर रेलवे क्रासिंग पर ट्रैफिक जाम की समस्या इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। रेल लाइन का दोहरीकरण और रेलवे की बनी वॉसिंगपिट तक ट्रेनों के जाने-आने के लिए अलग से दो रेल पटरी उस रेलवे क्रासिंग से गुजर रही है। फिर कई नई ट्रेनों की सेवा शुरू होने से इस रेल मार्ग पर ट्रेनों के ट्रैफिक का दबाव अलग से बढ़ा है। अगर दूरदर्शिता बरती गई होती तो संभव था कि रेलवे फुल्लनपुर क्रासिंग पर ओवर ब्रिज का प्रस्ताव बना होता। उन्होंने कहा कि सिटी स्टेशन के उत्तरी इलाके में तेजी से पसर रही शहर की आबादी और बाईपास पर बढ़ते ट्रैफिक के चलते फुल्लनपुर रेलवे क्रासिंग पर जाम की समस्या को दिन प्रतिदिन गहराते जाना है। लिहाजा अब वक्त आ गया है कि शहर के लोग उनकी इस प्रस्तावित लड़ाई में खुल कर साथ आएं।

शम्मी ने बताया कि अपनी इस प्रस्तावित लड़ाई में मालगोदाम रोड के लिए रौजा ओवरब्रिज पर लिंक ब्रिज की मांग को भी वह उठाएंगे। कहे कि रौजा ओवरब्रिज के निर्माण के बाद से न सिर्फ मालगोदाम रोड की व्यावसायिक गतिविधियां लगभग ठप हो गईं हैं बल्कि उधर के रिहायशी हिस्से के लोगों की भी दुश्वारियां बढ़ गई हैं।

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