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मुख्तार पर अब दो को होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

गाजीपुर। मुख्तार अंसारी के यूपी जेल ट्रांसफर के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अब सुनवाई की अगली तारीख दो मार्च तय की है।

इस सिलसिले में यूपी की योगी सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में 24 पन्नों के लिखित बयान में मुख्तार अंसारी को पंजाब के जेल से यूपी जेल ट्रांसफर करने के लिए तमाम कानूनी तर्क और तथ्य पेश किए गए हैं। पूर्व निर्धारित तारीख के हिसाब से बुधवार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। योगी सरकार की ओर से सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता और पंजाब सरकार के लिए जानेमाने वकील मुकुल रोहतगी ने बहस की।

यूपी सरकार की ओर से 24 पन्ने के लिखित बयान में कहा गया कि मुख्तार को लेकर दो राज्यों में विवाद के हालात बन गए हैं। इस दशा में सुप्रीम कोर्ट को अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया गया कि मुख्तार के लिए जिन बीमारियों का जिक्र पंजाब सरकार कर रही है। उनसे  साल 2008 में भी उसके ग्रसित होने की बात सामने आई थीं। तब गाजीपुर जेल सुपरिटेंडेंट की तरफ से प्रस्तुत मेडिकल सर्टिफिकेट से यह बातें स्थापित होती हैं लेकिन उसके बावजूद मुख्तार अंसारी उस दौरान एमएलए के तौर पर विधानसभा का सत्र में शामिल होता रहा। फिर  जब वह यूपी के बांदा जेल में बंद था उस समय भी उसका उपचार नहीं चल रहा था। साल 2019 में पंजाब पुलिस को बांदा जेल प्रशासन एमपी-एमएलए कोर्ट से अनुमति लिए बगैर उसे सौंप दिया था। वह सरासर नियम विरुद्ध था और यूपी सरकार उस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन बांदा जेल सुपरिटेंडेंट को सस्पेंड भी कर चुकी है।

मुख्तार के वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि यूपी सरकार मुख्तार अंसारी जैसे एक छोटे आदमी को नाहक परेशान करने पर आमादा है। उस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अगर मुख्तार अंसारी छोटा व्यक्ति है, तो पंजाब सरकार बेशर्मी की हद तक जाकर उसका बचाव कर रही है।

उसी क्रम में पंजाब सरकार की तरफ से इस केस की अगली सुनवाई के लिए अर्जी डाली गई। उस अर्जी को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख दो मार्च मुकर्रर कर दी।

मालूम हो कि यूपी के मऊ विधायक मुख्तार अंसारी इन दिनों पंजाब के रोपड़ जेल में निरुद्ध हैं। उनके विरुद्ध कई मामलों का ट्रायल यूपी की कोर्टों में चल रहा है और उन कोर्टों से उन्हें पेश करने के आदेश दिए गए हैं। वह आदेश लेकर गाजीपुर तथा आजमगढ़ पुलिस मुख्तार को लाने के लिए पंजाब के रोपड़ जेल जा चुकी है और हर बार उन्हें बैरंग लौटना पड़ा है। रोपड़ जेल प्रशासन मुख्तार को गंभीर बीमारी की वहां के डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर यूपी भेजने से मना करता रहा है। लिहाजा यूपी सरकार अब इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले गई है।

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