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कार्यकाल खत्म होने से पहले ही जिला पंचायत चेयरमैन आशा यादव ने खाली कर दिया था बंगला

ग़ाज़ीपुर। जिला पंचायत चेयरमैन आशा यादव का कार्यकाल खत्म होने के साथ ही गुरुवार को डीएम एमपी सिंह ने बहैसियत प्रशासक की जिम्मेदारी संभाल ली। चेयरमैन  आशा यादव का कार्यकाल 13 जनवरी तक था।

हालांकि आशा यादव ने उसके पहले ही सरकारी सुविधाएं वापस कर दी थी। चेयरमैन के नाते मिला बंगला खाली कर दी थीं। गाड़ी भी लौटा दी थीं। उसी बीच डीएम एमपी सिंह ने छह जनवरी को ही जिला पंचायत में किसी तरह के भुगतान पर रोक लगा दी थी।

आशा यादव जिला पंचायत के चेयरमैन की कुर्सी पर 23 अगस्त 2017 को बैठी थीं। इस तरह उनका कुल कार्यकाल तीन साल चार माह 27 दिन का रहा। वह तत्कालीन चेयरमैन डॉ.वीरेंद्र यादव के एमएलए बनने के बाद हुए उप चुनाव में आशा यादव चैयरमैन चुनी गईं थीं।

कार्यकाल खत्म होने के बाद आशा यादव ने `आजकल समाचार` से बातचीत में कहा कि वह अपने चेयरमैन के पूरे कार्यकाल से पूर्णतः संतुष्ट हैं। जिला पंचायत के सम्मानित सदस्यों का पूर्ण सहयोग मिला। इसके लिए वह उनका अभारी हैं। अधिकारियों, कर्मचारियों का भी सहयोग सराहनीय रहा।

…और डीएम से सहमे कर्मचारी

गाजीपुर। डीएम एमपी सिंह के प्रशासक बनने से जिला पंचायत के कर्मचारी सहमे हैं। खासकर वह कलर्क जो अर्से से एक ही पटल पर जमे हैं। दरअसल चेयरमैन आशा यादव के कार्यकाल में वह कलर्क राजनीतिक पहुंच, प्रभाव के बूते अपनी कुर्सी महफूज रखे रहे। उनकी डर का वजह डीएम की ओर से हालिया बीएसए ऑफिस में ऐसे कलर्कों की फेटाई है।

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