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ताजिये के विवाद में एक ही समुदाय के दो पक्षों में विवाद, गोली चली, तीन जख्मी

गाजीपुर। ताजिये को लेकर अराजक तत्वों ने कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश की। मामूली बात को लेकर विवाद में गोली चली और तीन लोग घायल हो गए। घटना के कुछ ही देर बाद खुद पुलिस कप्तान रोहन पी बोत्रे मौके पर पहुंच गए। हालात काबू में आ गया। घटना सोमवार की रात करीब साढ़े आठ बजे शहर कोतवाली के रजदेपुर में हुई। इस मामले में एक पक्ष के सात लोगों को नामजद किया गया है। उनमें कुछ फरार हैं। दबाव बनाने के लिए पुलिस उनके परिवारीजनों को कोतवाली में बैठाई है। गोली से जख्मी आफाक हुसैन को इलाज के लिए वाराणसी भेजा गया है। जहां उसकी स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। गोली उसके पेट में लगी है जबकि अन्य घायलों में शादाब आलम को हाथ की अंगुली और अदीम आलम की एड़ी में गोली के छर्रे लगे हैं।

इस सिलसिले में रजदेपुर के मसूद आलम ने शहर कोतवाली में तहरीर दी। उन्होंने बताया कि वह लोग सदर इमाम चौक पर ताजिया सजा रहे थे। उसी बीच अभियुक्तगण ताजिया जुलूस विलंबित करने के लिए बेजा दबाव बनाने लगे। आपत्ति करने पर आफताब आलम अंसारी उर्फ शेरू गाली देते हुए अपने घर गया और असलहे लेकर लौटा और गोलियां दागने लगा। गोलियां चलते ही भगदड़ की नौबत आ गई।

उधर स्थानीय लोगों की मानी जाए तो पठान और जुलहों के बीच पहले से ही वर्चस्व को लेकर जोर आजमाइश चली आ रही है और ताजिये के बहाने दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और इस मामले में नामजद किए गए नदीम असगर को नाहक फंसाया गया है। नदीम शिया हैं। वारदात के वक्त वह मौके पर भी नहीं थे। उनका कसूर बस यही है कि वह मुख्य अभियुक्त आफताब आलम अंसारी उर्फ शेरू उनका करीबी है। दरअसल नदीम असगर को नामजद कराकर कुछ लोगों ने मुहल्ले की अपनी सियासत साधी है। पुलिस गहराई से विवेचना करेगी तो सारी हकीकत खुद सामने आ जाएगी।

इधर पुलिस कप्तान ने बताया कि फरार अभियुक्तों की शीघ्र गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम गठित की गई है। अभियुक्तों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होगी। उनके विरुद्ध गैंगस्टर लगाया जाएगा।

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