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भाजपाः लक्ष्य जिला पंचायत चेयरमैन की कुर्सी, गैर कॉडर भी कबूल!

गाजीपुर। भाजपा पंचायत चुनाव को अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का रिहर्सल मान रही है। शायद यही वजह है कि राष्ट्रीय से लगायत प्रदेश स्तर के नेता तक पंचायत चुनाव को पूरे दमखम से लड़ने की बात कर रहे हैं। अंदरखाने की बतकही से यह भी लगभग साफ है कि पार्टी का पूरा फोकस जिला पंचायत चुनाव पर है और लक्ष्य उसकी चेयरमैन की कुर्सी है।

हालांकि पार्टी नेतृत्व को उत्साहित करने वाली बात यह है कि इस बार जिला पंचायत सदस्य के टिकट के दावेदारों की फेहरिस्त लंबी है। यह तब है जब सीटों के आरक्षण की सूची नहीं आई है। जाहिर है कि अन्य प्रमुख दलों की तरह भाजपा को भी आरक्षण प्रक्रिया का इंतजार है। उसके बाद ही टिकट के लिए आवेदन लेने-देने का काम होगा। गाजीपुर जिला पंचायत की कुल 67 सीट है। पार्टी की गतिविधियों पर नजर रखने वालों की मानी जाए तो टिकट बंटवारे की रणनीति चेयरमैन की कुर्सी को लक्षित करके ही बनेगी।

पार्टी यह लगभग मानकर चल रही है कि जिला पंचायत चेयरमैन की कुर्सी इस बार सामान्य रहेगी। अथवा अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रहे। उस दशा में पार्टी किसे चेयरमैन का उम्मीदवार बनाएगी। इस सवाल पर विगत दिनों पार्टी की हुई कोर कमेटी की बैठक में मंथन भी हुआ था। तब अलग-अलग राय आई थी। एक राय यह थी कि चेयरमैन के उम्मीदवार का चेहरा तय कर पहले सदस्य के चुनाव में उसकी जीत सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी जाए। दूसरी राय थी कि पहले सदस्यों का चुनाव हो जाए। तब निर्वाचित सदस्यों में चेयरमैन की उम्मीदवारी तय की जाए। उस बैठक में यह भी बात उठी थी कि चेयरमैन के चुनाव में मोटी रकम खर्च होगी। उसी हिसाब से उसके लिए सामर्थ्यवान उम्मीदवार की जरूरत पड़ेगी। तब सवाल आया था कि अगर वैसा उम्मीदवार पार्टी कॉडर का नहीं मिला। तब क्या होगा। उस पर कोर कमेटी के कुछेक का कहना था कि उस स्थिति में गैर कॉडर भी कबूल किया जा सकता है।

वैसे शुरू में चर्चा थी कि पार्टी के एक ओहदेदार नेताजी अपनी पत्नी को चेयरमैन की कुर्सी पर बैठाने का तानबाना बुन रहे हैं लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने जब साफ कह दिया कि पार्टी के एमपी, एमएलए, एमएलसी अथवा सरकार के मंत्री अपने परिवार या रिश्तेदार को पंचायत चुनाव नहीं लड़ाएंगे तो वह नेताजी अपनी उस `परियोजन` को रोक दिए। बावजूद नेताजी की यही दिली इच्छा है कि चेयरमैन की कुर्सी पर उनका कोई अपना ही बैठे। दरअसल वह नेताजी जिला पंचायत के चेयरमैन की कुर्सी के नफा-नुकसान से वाकिफ हैं।

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