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शिक्षकों ने माना कि नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं का होगा विकास

गाजीपुर। नई शिक्षा नीति से भारतीय भाषाओं के और विकास की राह मिलेगी। स्वामी सहजानंद डिग्री कॉलेज में बुधवार को हुए नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं और कला संस्कृति का संवर्धन विषयक वेबिनार में यह निष्कर्ष सामने आया। वेबिनार में उत्तर प्रदेश सहित अन्य प्रदेशों के शिक्षकों ने भी हिस्सा लिया।

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वेबिनार की संयोजक इतिहास विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर निवेदिता सिंह ने विषय प्रवर्तन करते हुए नेल्सन मंडेला के उस कथन को उद्धृत करते हुए कहा कि शिक्षा सामाजिक बदलाव का सबसे सशक्त औजार है। वेबिनार की शुरूआत राजनीति शास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश सिंह ने की। उन्होंने कहा कि भरतीय शिक्षा के चार आयाम मिलते हैं। प्रचीन शिक्षा व्यवस्था संस्कार मूलक, औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली विचारमूलक थी। फिर आजादी के बाद शिक्षा प्रणाली रोजगार मूलक और वर्तमान में शिक्षा प्रणाली बाजार मूलक हो गई है लेकिन नई शिक्षा नीति में वह सभी चार आयामों को समाहित करने का प्रयास है। वेबिनार की मुख्य वक्ता इतिहास विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुराधा सिंह ने भाषा पर ऐतिहासिक दृष्टि डालते हुए कहा कि भाषा के लुप्त होने का एक प्रमुख कारण पुंजीवाद है। उन्होंने वैश्विक महामारी कोविड-19 की चर्चा करते हुए कहा कि आज पूरी दुनियां भारतीय संसकारों के महत्व को मानने लगी है।

वेबिनार के विशिष्ट वक्ता डॉ. राधवेंद्र पांडेय ने नई शिक्षा नीति की सार्थकता का जिक्र करते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के विकास को प्राथमिकता मिली है। वेबिनार की अध्यक्षता मेजबान कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. विलोक सिंह ने नई शिक्षा नीति की प्रकृति का विश्लेषण करते हुए कहा कि यह नीति समता मूलक समाज की रचना में यह दूरदर्शी उपक्रम साबित होगी। संचालन हिंदी विभाग के सहायक प्रोफेसर राकेश पांडेय ने किया। अंत में डॉ. नरनारायण ने आभार जताया। वेबिनार के प्रारंभ में मेजबान कॉ़लेज के प्राचार्य डॉ़. रवींद्रनाथ राय शुभकामना देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम छात्रों, शोधार्थियों सहित समाज के हर वर्ग को प्रोत्साहित करेगा।

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