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ब्रिगेडियर उस्मान की टूटी कब्र, खफा सांसद अफजाल अंसारी

गाजीपुर। ‘नौशेरा के शेर' ब्रिगेडियर उस्मान की कब्र की बदहाली को लेकर जहां भारतीय सेना ने सख्ती दिखाई है, वहीं उनके नातेदार गाजीपुर के अंसारी परिवार ने भी तल्खी जताई है। ब्रिगेडियर उस्मान सांसद गाजीपुर अफजाल अंसारी के नाना लगते थे।

ब्रिगेडियर उस्मान की कब्र राजधानी दिल्ली के जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी कैंपस में है। कब्र का एक हिस्सा टूट गया है। मीडिया में आई तस्वीर उसकी बेकदरी की गवाही साफ कर रही है। उस तस्वीर को साझा करते हुए सांसद गाजीपुर ने `आजकल समाचार` से कहा कि अफसोस है कि जिस जांबाज फौजी अफसर ने अपने मुल्क की इज्जत, हिफाजत खातिर खुद को कुर्बान कर दिया, उसकी कब्र की हिफाजत तक करने में यह मुल्क नाकाम है। बताए कि उन्होंने इसके लिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी दिल्ली के प्रशासन को चिट्ठी भेजी है। उसमें गुजारिश की है कि कब्र की देखभाल की जिम्मेदारी ब्रिगेडियर उस्मान मेमोरियल सोसायटी को सौंप दी जाए। उस सोसयटी की चेयर पर्सन कभी अफजाल अंसारी की मां मरहूम राबिया बेगम थीं और ब्रिगेडियर उस्मान की कब्र जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी कैंपस में है। अफजाल अंसारी ने बताया कि इस सिलसिले में फौज के अफसरों से भी उनकी बात हुई है।

सांसद गाजीपुर ने बताया कि ब्रिगेडियर उस्मान की कब्र की इस कदर बेकदरी की खबर कोई पहली बार सामने नहीं आई है। साल 2004 में वह गाजीपुर के पहली बार सांसद बनने के बाद वहां फातिया पढ़ने पहुंचे थे। वह उसकी बदहाली देख दंग रह गए थे। उस कब्र की बगल में ही स्थित कांग्रेस के अध्यक्ष रहे डॉ.मुख्तार अंसारी की कब्र की दशा भी कमोवेश वही थी। तब उन्होंने खुद अपने दोनों पूर्वजों की कब्र की मरम्मत, साफ-सफाई कराई थी। हालांकि तब जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उस पर एतराज भी जताया था।

उधर एक खबरिया चैनल के पोर्टल पर आई खबर के मुताबिक सेना ने ‘हाई-लेवल’ पर  जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी प्रशासन को महावीर चक्र विजेता ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की क्रब की मरम्मत करने के लिए कहा है। सेना कही है कि यह वीआईपी-कब्रिस्तान यूनिवर्सिटी के भूखंड में है। लिहाजा क्रबिस्तान की देखरेख की जिम्मेदारी भी यूनिवर्सिटी की है इसलिए जामिया मिल्लिया इस्लामिया को ही कब्र की मरम्मत करानी चाहिए। अगर यूनिवर्सिटी ने मरम्मत नहीं कराई तो यह काम सेना अपने हाथों में खुद लेगी।

घोसी (मऊ) के बीबीपुर में जन्मे थे ब्रिगेडियर उस्मान

ब्रिगेडियर उस्मान का जन्म 15 जुलाई 1912 को मऊ जिले के घोसी तहसील क्षेत्र स्थित बीबीपुर गांव में हुआ था। भारत के विभाजन से पहले ब्रिगेडियर उस्मान ब्रिटिश सेना की बलूच रेजीमेंट में थे। देश के विभाजन के बाग बलूच रेजीमेंट पाकिस्तानी सेना का हिस्सा बन गई लेकिन ब्रिगेडियर उस्मान ने पाकिस्तानी सेना का हिस्सा बनने से इन्कार कर दिया था। कहा जाता है कि पाकिस्तान के कायदे आजम ने उन्हें अपनी सेना का प्रमुख बनाने तक की पेशकश की थी लेकिन वह भारतीय सेना की डोगरा रेजीमेंट से जुड़ गए थे। बाद में डोगरा रेजीमेंट पैराशूट रेजीमेंट में तब्दील हो गया था। उसी बीच जम्मू-कश्मीर हथियाने के लिए पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया था। उसका जवाब देने के लिए उनकी रेजीमेंट नौशेरा के मोर्चे पर डटी थी। ब्रिगेडियर उस्मान की जांबाजी के आगे पाकिस्तानी सैनिकों के पांव उखड़ गए थे। तब पाकिस्तान की हुकूमत उनके सिर पर 50 हजार रुपये का ईनाम घोषित की। आखिर में उस युद्ध में तीन जुलाई 1948 में वह शहीद हो गए। उसके बाद उनका पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया और पूरे सैनिक सम्मान के साथ जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी कैंपस में उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उस मौके पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु भी मौजूद थे। बाद में शहीद ब्रिगेडियर उस्मान को भारतीय सेना के दूसरे सबसे बड़े सम्मान महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

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