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निलंबित डीपीआरओ अनिल सिंह की वापसी की चर्चा

गाजीपुर। कोरोना किट घोटाले में तत्काल प्रभाव से निलंबित डीपीआरओ अनिल सिंह की वापसी की भी चर्चा शुरू हो गई है।

अनिल सिंह की डीपीआरओ पद पर दोबारा वापसी की बात करने वाले उनके शुभेच्छुओं का कहना है कि कोरोना किट में घोटाले के आरोप की पुष्टि ही नहीं हुई है। आरोप यह लगा कि ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई गई कोरोना किट निर्धारित 2800 रुपये की जगह दूने से अधिक कीमत वसूली गई।

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डीपीआरओ के शुभेच्छुओं के अनुसार बीते 21 जुलाई को जिला पंचायत सभागार में बुलाई गई ग्राम प्रधानों की बैठक में निवर्तमान डीएम ओमप्रकाश आर्य ने स्पष्ट कहा था कि कोरोना किट में ऑक्सीमीटर तथा थर्मल स्क्रीनिंग मीटर के ही 2800 रुपये भुगतान होंगे। किट में एक लीटर सेनेटाइजर के 100 रुपये अतिरिक्त देय होंगे। इनके अलावा किट के लिए हैंड ग्लव्स और मास्क सीएमओ की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा। बाद में उसी हिसाब से ग्राम पंचायतों को भुगतान करने को कहा भी गया। कुल 1237 ग्राम पंचायतों में मात्र 39 ने कोरोना किट का भुगतान भी किया। भुगतान करने वाली ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा देवकली तथा जमानियां ब्लाक की हैं। फिर सवाल है कि कोरोना किट की निर्धारित से दोगुनी कीमत वसूले जाने की बात कहां से आई। इसका जवाब गाजीपुर के ऊपर के अधिकारी दे नहीं पा रहे हैं बल्कि जवाब देने की जिम्मेदारी एक दूसरे पर थोप रहे हैं। यह भी तय है कि ग्राम पंचायतों को डीपीआरओ दफ्तर से कोरोना किट की अत्यधिक कीमत की बिल भी नहीं भेजी गई है। इधर निलंबित डीपीआरओ अनिल सिंह के विरूद्ध लामबंद ग्राम प्रधानों का कहना है कि अनिल सिंह के पक्षकार चाहे जो सफाई दें लेकिन वह घोटाले के आरोप से बच नहीं पाएंगे। उनके विरुद्ध ठोस तथ्य यह भी है कि उन्होंने कोरोना किट की खरीद के अधिकार को खुद के लिए केंद्रित कर लिया जबकि शासन ने यह जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को ही सौंपी है।

ग्राम प्रधानों की मानी जाए तो जांच के लिए गठित एसआईटी इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं करेगी। आखिर कोरोना किट की खरीद को केंद्रित करने के पीछे घोटाले की ही नीयत थी। वैसे स्वच्छता मिशन, आवासीय योजना में भी उनकी करतूत किसी से छिपी नहीं है।

मालूम है कि गाजीपुर, सुल्तानपुर सहित प्रदेश के कुछ और जिलों में कोरोना किट के घोटाले का मामला संज्ञान में आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान में लेकर तत्काल प्रभाव से गाजीपुर और सुल्तानपुर के डीपीआरओ को निलंबित कर सीआईटी गठित कर जांच का निर्देश दे दिया था।          

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