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‘देश में रहूं, प्रदेश में रहूं, काहूं भेष में रहूं, पर रउरे कहईबो, रउरे कहईबो’

गाजीपुर। कुछ भी तो नहीं बदले मनोज सिन्हा। वैसे ही हैं, जैसे गाजीपुरियों के लिए पहले थे। वही देहभाषा। वही देसज जुबान। उतनी ही संजीदगी। उतनी ही सादगी। उतनी ही शुचिता और अपनों के करीब पहुंचने की उतनी ही बेताबी तो खुद को लेकर उतनी ही बेपरवाही भी।

जम्मू-कश्मीर का उपराज्यपाल बनने के बाद पहली बार अपने गृह जिला गाजीपुर आए  मनोज सिन्हा का बुधवार की दोपहर पूर्व घोषित कार्यक्रम से करीब एक घंटा विलंब से 12 बजे उनका स्टेट प्लेन अंधऊ हवाई पट्टी पर लैंड किया। जहां अपने इंतजार में कतारबद्ध मौजूद भाजपा नेताओं से वह एक-एक कर मिले। उनके अभिवादन लिए। उन नेताओं में भाजपा जिलाध्यक्ष भानूप्रताप सिंह, महामंत्री ओमप्रकाश राय व पं.श्यामराज तिवारी के अलावा विधायक त्रय अलका राय, सुनीता सिंह,  डॉ.संगीता बलवंत, नगरपालिका चेयरमैन सरिता अग्रवाल, पूर्व चेयरमैन विनोद अग्रवाल, जितेंद्रनाथ पांडेय, नरेंद्रनाथ सिंह आदि प्रमुख थे।

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हवाई पट्टी से श्री सिन्हा सड़क मार्ग से सवा 12 बजे अपने पैतृक गांव मोहनपुरा के लिए निकले। हवाई पट्टी के बाहर मौजूद जनसमूह की अपने लिए आत्मीयता, उत्सुकता देख और नारे सुन अपनी गाड़ी रुकवा कर प्रोटोकॉल तोड़ उनके बीच पहुंच गए।

मोहनपुरा 1.20 बजे पहुंचने पर मिलने-मिलाने के बीच वह अपने पैतृक आवासीय परिसर में बनी ठाकुरवाड़ी में दर्शन-पूजन किए। सत्यनारायण कथा सुने। आरती किए। पूजन में उनका साथ पत्नी नीलम सिन्हा तथा पुत्र अभिनव सिन्हा ने भी दिया। ठाकुरवाड़ी के पुजारी दिवाकर पाठक व पुरोहित सर्वेश उपाध्याय ने पूजन कार्य संपन्न कराया। मोहनपुरा में डीसीएफ चेयरमैन विजयशंकर राय, डीसीबी के पूर्व निदेशक रमाशंकर प्रधान, वीरेंद्र राय, प्रधानाचार्य रविंद्र नाथ राय, कृपाशंकर राय, जितेंद्र वर्मा, ओमप्रकाश उपाध्याय, देवेश कुमार राय, विनोद राय, सूर्यभान राय आदि भी थे।

मोहनपुरा के बाद ढाई बजे वह जिला मुख्यालय पर लंका मैदान में अपने लिए आयोजित नागरिक अभिनंदन समारोह में साढ़े तीन बजे पहुंचे। वहां मनोज सिन्हा ने संक्षिप्त और भावपूर्ण संबोधन किया। बोले-जैसा मैं पहले था, वैसा ही आज भी हूं। आज मैं जिस मुकाम पर हूं, वह आप लोगों के आशीर्वाद और स्नेह की बदौलत हूं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने मुझपर विश्वास करके जो दायित्व सौंपा है, उसको मैं पूरा कर रहा हूं। कोई ऐसा काम नहीं होगा, जिससे गाजीपुर का नाम कलंकित हो। भले ही आप लोगों से दूर हूं, लेकिन मेरे मन में आप लोग है। मैं पहले भी आपका था और हमेशा रहूंगा। आप लोगों ने जो प्यार-सम्मान मुझे दिया, आपके आशीर्वाद से वही प्यार और सम्मान जम्मू-कश्मीर के लोग भी मुझे दे रहे हैं। मेरा प्रयास है कि पीएम मोदी ने जिस भरोसे से मुझे वहां भेजा, उनके भरोसे पर मैं खरा उतरूं। इस क्रम में वह लोगों को मां वैष्णो और बर्फानी बाबा के दर्शन का निमंत्रण भी दिए। कहे-आप लोग मां कामाख्या का दर्शन कर लिए। अब वैष्णो माता के दर्शन की तैयारी कीजिए। अगली बर्फानी बाबा की जो यात्रा होगी, उसमें भी गाजीपुर के लोगों का भारी मात्रा में स्वागत करने के लिए वहां लोग रहेंगे। उन्होंने अपनी बात इन पंक्तियों से समाप्त की-देश में रहूं, प्रदेश में रहूं, काहूं भेष में रहूं, पर रउरे कहईबो, रउरे कहईबो धन्यवाद, जय भारत। समारोह में अभिनंदन पत्र पूर्व एमएलसी बाबूलाल बलवंत पढ़े। समारोह मे कृष्ण बिहारी राय,प्रभुनाथ चौहान, विजयशंकर राय, रणजीत कुमार सिंह एडवोकेट,  रामनरेश कुशवाहा, अखिलेश सिंह, राजेश भारद्वाज, सरोज कुशवाहा, अच्छे लाल गुप्त,मुराहू राजभर,सरोज मिश्रा, रूद्रा पांडेय,विपिन सिंह, मीडिया प्रभारी शशिकांत शर्मा आदि प्रमुख लोग मौजूद थे। संचालन हरिनारायण हरिश जी ने किया।

समारोह के बाद श्री सिन्हा शहर के शास्त्री नगर स्थित दिववंगत शिक्षक नेता विनोद सिंह के आवास पर पहुंच कर पारिवारीजनों से मिलकर शोक संवेदना जताए। उसके बाद डॉ. डीपी सिंह के आवास पर पहुंचे और उनके पिता भाजपा के संस्थापक जिलाध्यक्ष बच्चन सिंह के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त किए। फिर भुतहियाटांड दिवंगत पारस बिंद के घर पहुंच कर शोक संवेदना जताए। इस सबमें उन्हें वक्त का भी ख्याल नहीं रहा। लिहाजा उनके इंतजार में अंधऊ हवाई पट्टी पर खड़े स्टेट प्लेन को सूर्यास्त से पहले 4.40  बजे श्री सिन्हा की पत्नी को ही लेकर वापस वाराणसी की उड़ान भरनी पड़ी। बाद में सड़क मार्ग से श्री सिन्हा शाम साढ़े पांच बजे वाराणसी के लिए रवाना हुए।

 

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