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ढहने लगा शम्मे हुसैनी हॉस्पिटल, तीन जेसीबी और एक पोकलैंड लेकर तड़के धमक पड़ा था सरकारी अमला

गाजीपुर। वही हुआ जैसा अनुमान था। सरकारी अमला शनिवार को तड़के शम्मे हुसैनी हॉस्पिटल, गंगा पुल की बिल्डिंग सहित पूरे कैंपस को ढहाने लावलश्कर लेकर पहुंच गया।

ढहाने का काम सुबह करीब पौने नौ बजे कैंपस के पूरबी छोर (गंगा पुल) से शुरू हुआ। एहतियातन मौके पर कई थानों की फोर्स तैनात है। एडीएम, एएसपी के अलावा एसडीएम और कई सीओ भी मौके पर डटे हैं। ढहाने में काफी संख्या में मजदूर और तीन जेसीबी तथा एक पोकलैंड लगाई गई है। प्रशासन की इस कार्रवाई को देखने के लिए आमजन का भी मजमा लगा है।

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मालूम हो कि गंगा पुल स्थित शम्मे हुसैनी हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर प्रबंधन को डीएम की अगुवाई वाली आठ सदस्यीय बोर्ड के शुक्रवार की शाम आए फैसले के बाद यह कार्रवाई हो रही है। एसडीएम सदर प्रभास कुमार ने बीते आठ अक्टूबर को हॉस्पिटल एवं ट्रामा सेंटर को ढहाने का आदेश दिया था। इसके लिए प्रबंधन को एक हफ्ते की मोहलत दी थी। उन्होंने वह फैसला राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के नियमों के हवाले से दिया था। उस नियम के तहत गंगा तट से 200 मीटर के दायरे में किसी तरह के पक्के निर्माण पर पूरी तरह रोक है। एसडीएम ने अपने आदेश में कहा था कि एनजीटी के तय मानक की अनदेखी कर हॉस्पिटल का भवन और कैंपस के निर्माण को अवैध करार देते हुए उसे ढहाने के लिए एक हफ्ते की मोहलत दी थी। एसडीएम सदर के उस आदेश को हॉस्पिटल प्रबंधन ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने उस पर सुनवाई के बाद 14 अक्टूबर को अपने फैसले में कहा कि इस मामले में याचि उचित न्यायिक तरीके से चले। एसडीएम के आदेश पर आपत्ति को डीएम के स्तर से दस दिन में निस्तारित किया जाए। उसके बाद हॉस्पिटल प्रबंधन ने डीएम की कोर्ट में अर्जी लगाकर एसडीएम सदर के आदेश पर रोक लगाने की अपील की। डीएम एमपी सिंह ने अपनी अगुवाई में आठ सदस्यीय बोर्ड गठित कर हॉस्पिटल प्रबंधन की अर्जी पर सुनवाई के बाद उसे खारिज कर दिया।

बोर्ड के उस फैसले के बाद ही प्रबंधन ने रात में ही हॉस्पिटल सहित पूरे कैंपस को खाली करना शुरू कर दिया था। वहां दाखिल गंभीर रोगी भी एंबुलेंस के जरिये रातों रात अन्यत्र शिफ्ट कर दिए गए थे और अब जबकि ढहाने का काम शुरू हो गया है तो अनुमान लगाया जा रहा है कि दोपहर के बाद ही वहां का सबकुछ जमीदोंज हो पाएगा। पूरा कैंपस 27 बीघे में पसरा है। उसमें हॉस्पिटल, ट्रामा सेंटर के अलाव नर्सिंग कॉलेज, हॉस्टल, रेस्तरां, ट्रैक्टर का शो रूम, प्रशासनिक बिल्डिंग बनी हैं। इस सबका हिसाब लगाया जाए तो प्रबंधन का करोड़ों का इसमें निवेश रहा है।

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