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…जब ऑफिस के स्थापना दिवस पर उपराष्ट्रपति ने ‘बाबा’ को याद किया

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सरजू पाण्डेय की आज 31वीं पुण्यतिथि पर विशेष

शहीदों की धरती गाजीपुर से करीब 400 किमी दूर झारखंड की राजधानी रांची के प्रतिष्ठित अखबार के स्थापना दिवस का कार्यक्रम चल रहा था। मंच पर उपष्ट्रपति व राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू, उपसभापति हरिवंश,  राज्यपाल समेत कई महत्वपूर्ण हस्तियां मौजूद थीं। मैं अखबार के मुलाजिम के तौर पर पीछे दर्शक दीर्घा में बैठा था। तभी उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कश्मीर में धारा-370 के हटने को महत्वपूर्ण घटना करार दिया। उन्होंने अपने संबोधन में 60 और 70 दशक के कई पुराने स्वतंत्रता सेनानियों, समाजवादी और कम्युनिस्ट नेताओं के साथ मेरे दादाजी सरजू पाण्डेय का नाम लेते हुए कहा कि वह सभी लोग चाहते थे कि जम्मू कश्मीर से धारा-370 हटे और यह अन्य राज्यों की तरह ही भारत का अभिन्न अंग बने। मैं इतनी बड़ी हस्ती के मुंह से अपनी दादाजी का नाम सुन कर दंग रह गया। मेरे मन और चेहरे पर गर्व के भाव उमड़ आये। बगल में बैठे मेरे एक सहकर्मी ने मुझसे कहा कि  देखिये आपके नायडू जी को पता नहीं होगा कि जिनका जिक्र वह कर रहे हैं  उनका पोता सामने ही बैठा है। आज दादाजी को गुजरे करीब 31 साल हो गये। उन्हें याद करके अक्सर बचपन की स्मृतियों में चला जाता हूं जब घर का बैठका लोगों से भरा रहता था। दादाजी लोगों की समस्याएं सुनते। उन्हें हल करने के लिए संबंधितजनों को फोन पर जरूरी निर्देश देते। फिर दादाजी चले गये। मॉस्को से खबर आई। उनका पार्थिव शरीर घर गाजीपुर आया। घर के बाहर लोगों का रेला उमड़ पड़ा। विशेश्वरगंज से लेकर गंगाघाट तक केवल लोगों की भीड़। सभी अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने आये थे। घर के पुराने एल्बम में उस समय की कुछेक तस्वीरें इसकी गवाह हैं। दादाजी के जाने के बाद हमारा घर खास से आम हो गया। सभी रोजी रोटी की जुगाड़ में लग गये। राजनीतिक विज्ञान का विद्यार्थी होने के नाते उनके राजनीतिक नजरिये पर भी बात होनी चाहिए। उनकी विचारधारा और संघर्ष किसी रुमानी अभिनेता जैसा लगता है। उनकी जीवनी को पढ़ा और नजदीक से महसूस किया। उनके हर फैसले में  चाहे वह परिवार के बारे में हो या पार्टी के बारे में प्रगतिशीलता ही दिखती है। वह दो बार रसड़ा और दो बार गाजीपुर से सांसद रहे। बाद के दिनों में विधान परिषद सदस्य भी बने। गाजीपुर के हर छोटे बड़े नेताओं के बीच में उनके समय के राजनीतिक किस्से मशहूर हैं। मसलन कैसे उन्होंने 1942 में कासिमाबाद का थाना फूंका और तिरंगा लहराया। गांव के घर की ब्रितानी हुकूमत ने कुर्की करायी। कैसे पहले चुनाव में रसड़ा लोकसभा सीट और विधानसभा की मोहम्मदाबाद सीट से एक साथ जीते। बाद के जीवन में उनके घर से कोई भूखा,  बीमार या बेसहारा निराश नहीं लौटता। कैसे इंदिरा गांधी गाजीपुर में प्रचार के लिए आतीं और कहतीं पाण्डेय जी गलत पार्टी में सही इंसान हैं। कई लोग मुझे कहते हैं कि आपके दादाजी ने परिवार के लिए कुछ नहीं किया। मैं कहता हूं अगर किये होते तो वह साख और इज्जत नहीं रहती।दादाजी मेरे लिए भी सदा स्मृतियों में रहेंगे।… श्रद्धेय दादाजी को मेरा सादर नमन!—--ऋषि

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