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कोरोना किट घोटाला: एसआईटी जांच की घोषणा से हड़कंप

गाजीपुर। ग्राम पंचायतों में कोरोना किट की आपूर्ति के मामले में हुए घोटाले की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी गठित हुई है। इस आशय की घोषणा को लेकर गाजीपुर के भी संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। मालूम हो कि इस मामले में शासन ने बीते सात सितंबर को गाजीपुर के डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।

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गाजीपुर में कोरोना किट की खरीद का अधिकार ग्राम पंचायतों को ही दिया है और उसकी कीमत भी प्रति किट 2800 रुपये तय किया है लेकिन तत्कालीन डीपीआरओ ने खरीद का काम केंद्रीयकृत कर इसकी जिम्मेदारी खुद ले ली थी। किट सीधे ग्राम पंचायतों को उपलब्ध करवा दी थी और उनके भुगतान के लिए ग्राम पंचायतों को प्रति किट 6900 रुपये के हिसाब से भुगतान करने को कहा था। हालांकि इसको लेकर ग्राम प्रधानों ने कड़ा एतराज जताया था। इस सिलसिले में ग्राम प्रधान संघ डीएम से मिला था। डीएम के ओमप्रकाश आर्य ने हस्तक्षेप किया था। उसके बाद यह दर प्रति किट 2900  रुपये पर आ गई थी।

गाजीपुर सहित सुल्तानपुर जिले में भी यह गड़बड़ी संज्ञान में आने के बाद मुख्यमंत्री ने दोनों जिलों के तत्कालीन डीपीआरओ को निलंबित कर अब जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी है। एसआईटी को दस दिन में जांच रिपोर्ट देने को कहा गया है। एसआईटी को राजस्व विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार कर रहीं हैं जबकि चिकित्सा शिक्षा सचिव अमित गुप्त तथा नगर विकास सचिव विकाश गोठलवाल बतौर सदस्य हैं। खबर है कि एसआईटी ने गाजीपुर के पंचायत राज विभाग से संबंधित पत्रावलियां भी तलब की है। यह भी उम्मीद की जा रही है कि एसआईटी टीम शीघ्र ही गाजीपुर आएगी।

…पर किसे मिलेगा डीपीआरओ का प्रभार

गाजीपुर के डीपीआरओ अनिल सिंह को निलंबित करने के बाद शासन ने फिलहाल इनकी जगह किसी को भेजा नहीं है। डीपीआरओ के अभाव में विभागीय कामकाज जारी रहे। इसके लिए  किसी को प्रभार दिया जाना है लेकिन प्रभार किसे सौंपा जाए गुरुवार की रात नौ बजे तक इस पर किसी निर्णय की अधिकृत जानकारी नहीं मिली थी। पूरे दिन यह जरुर चर्चा थी कि एडीपीआरओ आरसी उपाध्याय को प्रभार सौंपा जाएगा। हालांकि श्री उपाध्याय भी दूध के धुले नहीं हैं। अनिल सिंह से पूर्व यही डीपीआरओ थे लेकिन एक मामले में घोर अनियमितता के आरोप में अवनति की सजा देकर इन्हें एडीपीआरओ पद पर गाजीपुर में ही नियुक्त कर दिया गया।

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