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कोरोना किट की खरीद में घोटाले की कोशिश! पंचायत राज विभाग की भूमिका संदिग्ध

गाजीपुर। जहां कोरोना महामारी से गांवों में हाहाकार है वहीं पंचायत राज विभाग के भ्रष्ट अफसर इसे अपने लिए माकूल वक्त मान रहे हैं। अफसरों ने ग्राम पंचायतों में कोरोना किट की आपूर्ति के नाम पर बेजा रकम हड़पने की पूरी कोशिश की लेकिन ग्राम प्रधानों की तत्परता से उनकी दाल तो नहीं गली लेकिन कोरोना किट की आपूर्ति करने वाली फर्म का भुगतान जरूर लंबित हो गया है।

यह भी हढ़ें—आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां ‘बर्खास्त’

शासन ने कोरोना के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए हर ग्राम पंचायत में आशा कार्यकर्त्री को किट उपलब्ध कराने का आदेश दिया। यह भी कहा कि इस किट की खरीदारी ग्राम पंचायतें खुद करेंगी और इसका भुगतान 14वें वित्त आयोग के मद से होगा। गाजीपुर में कुल 1237 ग्राम पंचायतें हैं लेकिन पंचायत राज विभाग ने यह अधिकार ग्राम पंचायतों को देने के बजाए खुद ले लिया और ग्राम पंचायतों को फरमान सुना दिया गया कि प्रति किट के हिसाब से 6,900 रुपये का भुगतान किया जाए। मजे की बात यह कि इस बाबत विभाग ने ग्राम पंचायतों को लिखित में कुछ नहीं दिया। सब जुबानी रहा। ग्राम प्रधान संघ इस मामले को लेकर डीएम ओमप्रकाश आर्य के पास पहुंचा तब उनके हस्तक्षेप पर किट की कीमत घटकर 2,900 रुपये पर आ गई लेकिन यह भी मौखिक ही रहा। डीपीआरओ की मनमानी के खिलाफ विकास भवन में सोमवार को लामबंद होकर पहुंचे ग्राम प्रधानों ने एक बार फिर कोरोना किट की खरीद में घोटाले की कोशिश का मुद्दा उठाया। इस संबंध में ‘आजकल समाचार’ ने सीडीओ श्रीप्रकाश गुप्त से चर्चा की। उन्होंने बस इतना ही कहा कि यह प्रकरण पहले भी उठा था। तब डीएम ने हस्तक्षेप किया था।

किट में यह सब है

ग्राम पंचायतों में आपूर्ति की गई कोरोना किट में पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर और एक लीटर सेनेटाइजर।       

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